अपना गोत्र कैसे पता करें? (2023)

नमस्कार मित्रो आज हम आपको गोत्र क्या होता है और अपनी गोत्र कैसे पता करें इसके बारे में बताने वाले है अक्सर अपनी गोत्र को लेकर कई लोगो के मन में अलग अलग प्रकार के सवाल होते है एवं ज्यादातर लोगो को अपनी गोत्र का नाम पता नही होता ऐसे में यह आर्टिकल आपके लिए बहुत ही उपयोगी साबित हो सकता है.

gotra kya hota hai

हाल में हर एक व्यक्ति को अपनी गोत्र का नाम पता होना बेहद ही आवशक है क्युकी इस प्रकार की जानकारी आपके लिए कई प्रकार से उपयोगी साबित हो सकती है अगर आपको गोत्र के बारे में ज्यादा जानकारी नही है तो ऐसे में आप गोत्र क्या होता है एवं अपनी गोत्र कैसे पता करें यह आर्टिकल ध्यान से पढ़े ताकि आपको पूरी जानकारी समझ में आ सके.

गोत्र कैसे पता करें

जाति, धर्म, गोत्र, वर्ण यह सभी चीजे मनुष्य के द्वारा ही बनायीं गयी है इनके किसी न किसी ख़ास उद्देश्य से बनाया गया था यह सभी हमारे पूर्वजो की ही देन है जो की सैकड़ो वर्षो पहले शुरू की गयी थी एवं किसी भी गोत्र आदि का गठन इसीलिए किया गया था ताकि सभी लोगो को अपने स्तर पर उपयुक्त मान सम्मान प्राप्त हो सके.

आपको पता होगा की हमारे देश में समाज को चार वर्णों में बांटा गया है ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शुद्र इन चार वर्णों में बांटे जाने के बाद लोगो के द्वारा अपने वर्ग को लेकर अलग अलग जातियां बनायीं गयी जिसमे ब्राहमण, राजपूत, राजपुरोहित, चारण, कुम्हार, रावना राजपूत, वैष्णव आदि कई प्रकार की जातियां बनाये गयी इसके आधार पर सभी लोगो को अलग अलग जाति और वर्ण में बाँट लिया गया.

जब जाति का का विभाजन है तो इसके बाद अलग अलग गोत्र बनाए गये जिसके द्वारा हर जाति के लोगो को अलग अलग भागो में बांटा गया एवं हाल में हर एक जाति में अलग अलग प्रकार की कई गोत्र होती है इसी गोत्र को ध्यान में रखते हुए किसी भी समाज या जाति में लोगो के विवाह आदि किये जाते है एवं एक गोत्र के पुरुष महिला एक दुसरे के साथ शादी नहीं कर सकते क्युकी एक गोत्र में आने वाले सभी व्यक्ति भाई बहन के रूप में जाने जाते है.

हमारी कुलदेवी कौनसी है कैसे पता करें

हाल में कई लोगो को इसके बारे में पता नही होता की उनकी कुलदेवी कौनसी है तो इसके बारे में पता लगाना बेहद ही कठिन कार्य होता है क्युकी कई लोगो के पास कोई सबूत नहीं होता की उनके पूर्वजो ने कौनसी देवी को अपनी कुलदेवी माना था ऐसे में लोगो के लिए कुलदेवी का पता लगाना काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता है हालांकि आप अपने बुजुर्ग लोगो से संपर्क करके बातचीत के द्वारा इस बात का पता लगा सकते है की आपकी कुलदेवी कौनसी है.

अगर आपके बुजुर्गो को भी इसके बारे में जानकारी नही है की आपकी कुलदेवी कौनसी है तो ऐसे में आप अपने गौत्र से जुड़े अन्य व्यक्तियों से संपर्क करके जान सकते है की उनकी कुलदेवी कौनसी देवी है एवं आपकी गोत्र के लोग जिस देवता को कुलदेवी या कुलदेवता मानते है वही देवता आपके कुलदेवता हो सकते है.

एक ही गौत्र में विवाह क्यों नहीं होते

आपको पता होगा की कभी भी कोई भी महिला जो एक ही गौत्र के होते है वो एक दुसरे के साथ विवाह नहीं कर सकते क्युकी एक ही गौत्र में आने वाले सभी लोग भाई बहन होते है इस कारण से एक ही गौत्र के लोग एक दुसरे के साथ विवाह नहीं कर सकते अगर कोई पुरुष अपनी जाति में विवाह करता है तो सबसे पहले उसकी गौत्र देखी जाती है एवं अगर लड़की दूसरी गौत्र की हो तभी उन दोनों का विवाह हो सकता है.

सभी वर्ग किस प्रकार से होते है

जैसा की आपको पता होगा की वर्ग चार प्रकार के होते है ब्राहमण, क्षत्रिय, शुद्र, वैश्य इन चारो वर्णों को इनके कार्यो के आधार पर अलग अलग भागो में बांटा गया है एवं पहले के समय में हर व्यक्ति को अपने वर्ण के अनुसार ही कार्य करना होता था ऐसे में आपको पता होना आवश्यक है की कौनसा वर्ण किस प्रकार का होता हैं.

ब्राहमण वर्ण: यह वर्ण सबसे उत्तम वर्ण माना जाता है इनका कार्य पूजा पाठ करना, हवन करना एवं विवाह आदि करवाना होता था इनके सभी कार्य धर्म एवं संस्कृति से जुड़े हुए होते थे.

क्षत्रिय वर्ण: इस वर्ण में राजपूत आदि समाज आती है एवं इस वर्ण का कार्य राज व्यवस्था को संभालना और अपने क्षेत्र की जनता की दुश्मनों से रक्षा करना होता है यह वर्ग राजा महाराजाओं के लिए बनाया गया है इस वर्ण के लोग अपने राज्य के संचालन और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होते है.

वैश्य वर्ण: इस वर्ण के लोगो का कार्य लेखा जोखा रखना एवं आय व्यय की जानकरी रखना, खेतीबाड़ी करना, पशुपालन करना आदि होता है सामान्य रूप से समझे तो इस वर्ण में बनिया आदि वर्ण के लोग आते थे जो आय व्यय की जानकारी रखते थे एवं राजा के द्वारा दिए गये निर्देशों का पालन करते थे इसमें कई प्रकार की अलग अलग जातियां आती थी.

शुद्र वर्ण: इस वर्ण के लोगो को गाँव से बाहर रखा जाता थे इस वर्ण के लोग अपने राज्य के लिए गुप्तचर का कार्य करते थे एवं राज्य के लोगो की रक्षा के लिए कार्य करते थे.

इस प्रकार के चार अलग अलग वर्ण बनाए गये है इन वर्णों में कई प्रकार की अलग अलग जातिया आती है इन सभी जातियों को उनके कर्मो के आधार पर इन वर्णों में बांटा गया है.

इस आर्टिकल में हमने आपको गोत्र कैसे पता करें इसके बारे में जानकारी दी है हमे उम्मीद है आपको हमारी बताई जानकारी उपयोगी लगी होगी अगर आपको जानकारी अच्छी लगे तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर जरुर करें और इससे जुडा किसी भी प्रकार का सवाल पूछना चाहे तो आप हमे कमेंट करके भी बता सकते है.