नमस्कार मित्रो आज हम आपको Goldfish Ka Scientific Naam Kya Hai इसके बारे में बता रहे है कई लोग हर दिन गूगल पर इससे जुड़ा सवाल सर्च करते है व बहुत से लोगो को इसके बारे में जानकारी नहीं होती ऐसे में यह आर्टिकल इसीलिए लिखा गया है ताकि हम आपको इससे जुडी पूरी जानकारी इस आर्टिकल में बता सके व इसके बारे में जानकारी पाने के लिए आप हमारा यह आर्टिकल ध्यान से पढ़े.

Goldfish Ka Scientific Naam Kya Hai

आज के समय में बेहतर जनरल नॉर्लेज के लिए इस प्रकार की जानकारी बहुत ही उपयोगी होती है Google Goldfish Ka Scientific Naam Kya Hai इसके बारे में आप सभी को सटीक जानकारी होनी बेहद आवश्यक है इस तरह की जानकारी आपके भविष्य में बहुत ही उपयोगी सिद्ध हो सकती है इंटरनेट पर कई लोग इसके  बारे गलत जानकारी भी देते है इसलिए हमने आपको इससे जुडी सटीक जानकारी देने के उद्देश्य से ही यह आर्टिकल लिखा है.

Google Goldfish Ka Scientific Naam Kya Hai

कई लोग गोल्डफिश का साइंटिफिक नाम सुनहरी मछली समझ लेते है पर यह सही नहीं है क्युकी सुनहरी मछली इसे हिंदी में कहा जाता है व इसका साइंटिफिक नाम कैरासियस ऑराटस होता है वही इसे क्रूसियन कार्प के नाम से भी जाना जाता है व यह मछली कार्क परिवार से सम्बन्ध रखती है जो की ज्यादातर पूर्वी एशिया में पायी जाती है व इस मछली को सबसे पहले यूरोप में 17वी सताब्दी में खोजा गया था.

Goldfish से जुडी रोचक जानकारी

हम आपको गोल्डफिश के बारे में कुछ बेहद ही जरुरी और रोचक जानकारी के बारे में बता रहे है इससे आपको Goldfish के बारे में काफी कुछ जानने और सिखने को मिलेगा इसके लिए आप सभी पॉइंट को ध्यान से पढ़े .

  • गोल्डफिश का वैज्ञानिक नाम कैरासियस औराटस है.
  • हिंदी में इस मछली को सुनहरी मछली कहा जाता है.
  • गोल्डफिश कैरासियस जाती की मछली है.
  • गोल्डफिश हमेशा मीठे पानी में ही पायी जाती है.
  • गोल्डफिश का मूल श्रोत चीन है.
  • गोल्डफिश आकार में 20 cm की होती है.
  • गोल्डफिश का वजन 3 किलोग्राम तक हो सकता है.
  • गोल्डफिश की लम्बाई 45 सेंटीमीटर तक होती है.
  • गोल्डफिश हमेशा आँखे खोलकर सोती है.
  • गोल्डफिश 21 दिन तक बिना कुछ खाये जीवित रह सकती है.
  • गोल्डफिश की आँखों पर पलके नहीं होती.
  • गोल्डफिश मनुष्य को बहुत ही आसानी से पहचान सकती है.
  • गोल्डफिश भूख लगने पर कुछ के बच्चो को भी खा जाती है.
  • गोल्डफिश के भोजन की बात करें तो शैवाल, लार्वा, कीट आदि इसका पसंदीदा भोजन है.

गोल्डफिश किस वातावरण में रहती है

यह मछली बहुत ही शांत और नरम स्वाभाक की होती है व इस मछली को इसके अनुकूल परिस्थिति मिल जाए तो ऐसे में यह मछली 40 वर्ष तक जीवित रह सकती है परन्तु ज्यादातर बार देखा गया है की यह मछली मुश्किल से 8 से 9 वर्ष तक ही जीवित रह पाती है इसकी उम्र में इतनी भारी गिरावट होने के पीछे कई सारे अलग अलग कारण हो सकते है जिसके बारे में कई सारी रिसर्च भी चल रही है.

गोल्डफिश की आंते अन्य मछली की तुलना में थोड़ी कमजोर होती है क्युकी माना जाता है की गोल्डफिश को उतना ही भोजन खिलाना चाहिए जितना वो 4 से 5 मिनिट में खा सके व यह मछली दिन में 2 बार ही भोजन करती है अगर इस मछली को अधिक भोजन कराया जाए तो इससे इस मछली को आंतो से जुडी समस्या होने लगती है व इससे मछली मर भी सकती है.

इस मछली के सुरक्षित रहने के लिए पानी का तापमान 18-26 डिग्री सेल्सियस तक बेहतर माना जाता है व यह निश्चित तापमान वाले पानी में ही जीवित रह सकती है अगर पानी के तापमान में भरी बदलाव हो तो ऐसे में यह मछली मर सकती है.

गोल्डफिश कैसी दिखती है

ज्यादातर मामलों में इस मछली को सजावट के तौर पर पाला जाता है क्युकी यह बेहद ही सुन्दर दिखाई देती है इसका रंग सुनहरा होता है जो की हर व्यक्ति को आकर्षित कर सकता है इसका शरीर लंबा होता है व इसमें छोटे छोटे पंख लगे होते है इसका रंग काला, पीला, सफ़ेद, लाल, नीला आदि कई तरह का रंगबिरंगा होता है इसलिए इसे सुनहरी मछली कहा जाता है व इस मछली को सबसे पहले चीन ने पालतू मछली बनाया था.

क्या गोल्डफिश बुद्दिमान होती है

गोल्डफिश एक दिमाग बहुत ही अच्छा होता है व इसके याद रखने की क्षमता 3 माह तक की हो सकती है व इसकी मानसिक स्थिति इसके खानपान और रखरखाव पर निर्भर करती है यह मछली किसी भी आवाज या रंग और आकार आदि के बिच का अंतर आसानी से पता कर सकती है व अगर इस मछली को सही तरीके से प्रशिक्षण दिया जाये तो ऐसे में यह मछली कई तरह के करतब जैसे की लीम्बो, फेच और स्लैलम आदि भी दिखा सकती है.

गोल्डफिश पालते वक्त ध्यान रखे यह बाते

अगर कोई व्यक्ति गोल्डफिश को  पालना चाहता है तो इसके लिए उसे कुछ बातो को ध्यान में रखना जरुरी है व गोल्डफिश पालने के लिए तालाब आदि के पानी का तापमान गर्मी में भी 20 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं होना चाहिए व गोल्डफिश वाले टैंक को हो सके तो छाया में रखे यह मछली एक वर्ष की उम्र से ही अपने रंगबिरंगे सुनहरे रंग दिखाना शुरू कर देती है.

गोल्डफिश के भोजन की बात करें तो यह छोटे छोटे पौधों के साथ उसमे मौजूद जीवो को भी खा लेती है व जिस तालाब में सुनहरी मछली को  रखा जाए उस तालाब में उथला किनारा वाला क्षेत्र होना जरुरी है क्युकी ऐसे स्थान पर इस मछली की संतान छुपती है व इस मछली के खानपान का विशेष ध्यान रखना होता है क्युकी यह कई बार अधिक खाना खा लेती है इससे इस मछली के मरने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है.

Calculation – इस आर्टिकल में हमने आपको Google Goldfish Ka Scientific Naam Kya Hai इसके बारे में जानकारी दी है हमे उम्मीद है की आपको हमारी बताई जानकारी उपयोगी लगी होगी अगर आपको जानकारी अच्छी लगे तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करें और इससे जुड़ा किसी भी तरह का सवाल आदि पूछना चाहे तो आप कमेंट के द्वारा बता सकते है.

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मै रघुवीर चारण PMO Yojana का संस्थापक हूँ हमें लेख लिखना व किताब पढ़ना बेहद पसंद है है हम शिक्षा, कंप्यूटर, मोबाइल, सरकारी नौकरी, नई योजनाओं व इस प्रकार की अन्य कई जानकारी इस Website पर लिखते है

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