नमस्कार मित्रो आज हम आपको EEG Full Form In Hindi के बारे में बताने वाले है यह शब्द स्वाथ्य विभाग से जुडा हुआ है जिसके बारे में आपको पता होना बेहद ही आवश्यक है अगर आपको EEG के बारे में जानकारी नही है तो आप इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़े ताकि आपको पूरी जानकारी समझ में आ सके.

EEG Full Form In Hindi

EEG के बारे में अक्सर कई अलग अलग जगह पर हमे सुनने को मिलता है पर इस शब्द की जानकारी न होने से हमारे मन में कई तरह के सवाल आदि आने लगते है ऐसे में आपको EEG क्या है व किसे कहते है और इसका महत्त्व क्या होता है एवं EEG का इस्तमाल कब किया जाता है और EEG Full Form In Hindi क्या होता है इनके बारे में पता होना चाहिए.

EEG Full Form In Hindi

EEG किसे कहते है और इसका इस्तमाल कहाँ होता है इसके बारे में बताने से पहले हम आपको इसके पुरे नाम के बारे में बता देते है.

EEG Full Form – Electroencephalogram

हिंदी में इसे इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम कहा जाता है व चिकित्सा विभाग में यह बहुत ही महत्वपूर्ण उपकरण होता है इसकी मदद से मस्तिष्क की गतिविधियों की जाँच की जाती है.

EEG क्या है

जैसा की आपको हमने बताया की यह मस्तिष्क की गतिविधि को जंचता है और यह बताता है की निम्न व्यक्ति की मानसिक अवस्था सामान्य है या असामान्य है व इस तकनिकी के माध्यम से जो डॉक्टर मरीज का इलाज करते है उन डॉक्टर को न्यूरोलॉजिस्ट कहा जाता है इसमें डॉक्टर कंप्यूटर पर दिखाई देने वाली तरंगो के आधार पर व्यक्ति की मानसिक स्थिति का पता लगाते है.

EEG तकनीक में कई पहले तार होते है और उनके ऊपर छोटी सी डिस्क होती है जिसको इलेक्ट्रोड कहा जाता है तो इस डिस्क को खोपड़ी के हर हिस्से में लगाया जाता है और इसके बाद मस्तिष्क में मौजूद न्युरोंस की इलेक्ट्रिकल गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाता है व यह एलेक्ट्रोड मस्तिस्क की हर गतिविधि को तरंग के पैटर्न में प्रदर्शित करते है इस पैटर्न की बनावट के आधार पर डॉक्टर को पता चल पाता है की मरीज की मानसिक अवस्था सामान्य है या असामान्य है.

EEG कब की जाती है

कुछ मुख्य परिस्थिति में EEG टेस्ट करवाया जाता है यह टेस्ट अधिकांश सोने से जुडी समस्या होने पर करवाया जाता है इसके अलावा अचानक व्यवहार बदलने की समस्या होने पर, सर पर चोट लगने की स्थिति में, लीवर या ह्रदय ट्रांसप्लांट करने से पहले और ट्रांसलेट करने के बाद मानसिक अवस्था जानने के बाद आदि स्थिति में यह टेस्ट करवाया जाता है इस टेस्ट में मस्तिष्क से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हो जाती है.

EEG टेस्ट कैसे किया जाता है

इस टेस्ट में मरीज को अस्पताल में बैठकर या लेटाकर उसकी पूरी खोपड़ी पर छोटे छोटे तारो से जुड़े इलेक्ट्रोड को लगाया जाता है व यह इलेक्ट्रोड एक मशीन से कनेक्ट होते है व इसके बाद इलेक्ट्रोड को एक्टिव किया जाता है और यह मस्तिस्क की हर हलचल को रिकॉर्ड करने लगते है इस प्रक्रिया में मरीज को किसी प्रकार की परेशानी नही होती न ही इलेक्ट्रिक करंट या झटका दिया जाता है.

इलेक्ट्रोड जो डाटा इकठा करते है वो कंप्यूटर पर दिखाते है जो की एक सिग्नल के रूप में होते है व इन सिग्नल से दिमागी स्थिति का पता लगाया जाता है यह सब उन तरंगो के अलग अलग रंगों के कारण पता चलता है की मानसिक स्थिति कैसी है व इसके आधार पर डॉक्टर किसी भी मरीज का इलाज करते है यह तकनीक अपनाकर इलाज करने वाले डॉक्टर  न्यूरोलॉजिस्ट कहे जाते है.

EEG तरंगो के प्रकार

सामान्यत यह तरंगे 4 प्रकार की होती है जसकी फ्रीक्वेंसी 8 से 12 cps ( Cycle Per Second) तक होती है व यह तरंगे तब दिखाई देती है जब टेस्ट के वक्त मरीज की आँखे तो बंद होती है पर मानसिक रूप से मरीज सचेत होता है वही जब मरीज आँखे खोलकर ध्यान अवस्था में आ जाता है तो उस वक्त एल्फा तरंगे दिखाई नही देती.

👉 बीटा तरंग – इस तरंग की फ्रीक्वेंसी 13 से 30 cps ( Cycles Per Second) तक होती है व यह तरंग उस वक्त दिखाई देती है जब मरीज किसी दवाई का सेवन करना है.

👉 डेल्टा तरंग – इस तरंग की फ्रीक्वेंसी 3 cps ( Cycles Per Second)  से कम होती है व यह तरंग तब दिखाई देती है जब मरीज सोया हुआ हो.

👉 थीटा तरंग – इस तरंग की फ्रीक्वेंसी 4 से 7 cps ( Cycles Per Second) तक होती है व यह मुख्यत बच्चो के टेस्ट के दौरान दिखाई देती है.

EEG टेस्ट से पहले क्या करें

अगर किसी भी व्यक्ति को EEG टेस्ट करवाना है तो इसके लिए उसे उच्च बातो को ध्यान में रखना होता है व इस टेस्ट से पहले निम्न प्रक्रिया अपनानी होती है.

  • अगर आप किसी दवाई, हर्बल उत्पाद आदि का सेवन कर रहे है तो टेस्ट से पहले डॉक्टर को जरुर बताये.
  • टेस्ट से एक रात पहले अपने सर को अच्छे से धो ले व ध्यान रखे की आप किसी कंडिशनर या स्टाइलिंग उत्पाद का इस्तमाल न करे.
  • जिस दिन टेस्ट किया जाता है उस दिन कैफीन का सेवन न करे जैसे की चाय कॉफी आदि.
  • डॉक्टर द्वारा बताये निर्देशों का पालन करें.
  • EEG टेस्ट के दौरान सोना नही चाहिए व अगर सोना चाहते तो पहले डॉक्टर को जरुर बताये.

निम्न बातो को आप ध्यान रखे इन बातो को ध्यान में रखने से आपको टेस्ट के दौरान किसी प्रकार की परेशानी नही होगी व आपको बेहतर परिणाम प्राप्त होगे.

Calculation – इस आर्टिकल में हमने आपको EEG Full Form In Hindi के बारे में जानकारी दी है हमे उम्मीद है आपको हमारी बताई जानकारी उपयोगी लगी होगी अगर आपको जानकारी अच्छी लगे तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर जरुर करें और इससे जुदा किसी भी तरह का सवाल पूछना चाहे तो आप हमे कमेंट करके बता सकते है.

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