नमस्कार मित्रो आज हम आपको ECS Full Form In Hindi के बारे में बताने वाले है व ECS क्या होता है एवं किसे कहते है इसके बारे में विस्तृत रूप से बताने वाले है अक्सर कई लोग इसके बारे में पूछते रहते है क्युकी ज्यादातर लोगो को इसके बारे में पता नही होता ऐसे में हम आपको ECS से जुडी बेहद ही खास जानकारी बताने वाले है जिसके बारे में आपको पता होना बेहद ही आवश्यक है.

ECS Full Form In Hindi

हाल में कई बार आपने ECS के बारे में पढ़ा और सुना होगा लेकिन बेहद ही कम लोगो को इसके बारे में विस्तृत जानकारी पता होगी है की ECS किसे कहते है और ECS क्या होता है इस कारण से अक्सर लोग इससे जुडी जानकारी गूगल पर सर्च करते रहते है पर उन्हें इसकी सटीक जानकारी नही मिल पाती ऐसे में हम आपको ECS के बारे में बेहद ही आसान तरीके से बताने वाले है इसके बारे में जानने के लिए आप ECS Full Form In Hindi आर्टिकल को ध्यान से पढ़े.

ECS Full Form In Hindi

ECS क्या होता है एवं ECS किसे कहते है इसके बारे में बताने से पहले हम आपको ECS का हिंदी एवं अंग्रेजी में पूरा नाम क्या होता है इसके बारे में बता रहे है ताकि आपको इसका पूरा नाम पता चल सके.

ECS Full Form – Electronic Clearing Service

हिंदी में ECS को विद्युतीय समाशोधन सेवा भी कहा जाता है यह एक बैंक अकाउंट से दुसरे बैंक अकाउंट में पैसे ट्रान्सफर करने का बेहद ही अच्छा इलेक्ट्रोनिक तरीका होता है जिसमे ग्राहक को अपने अकाउंट से जुड़े इलेक्ट्रोनिक क्रेडिट और डेबिट कार्ड से लेनदेन की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है.

ECS क्या है

जैसा की आप जानते है की इसे विधुत्तीय समाशोधन सेवा कहा जाता है जो की बैंक के द्वारा पैसे ट्रान्सफर करने का एक इलेक्ट्रॉनिक तरीका होता है जिसे लेनदेन के लिए इस्तमाल किया जाता है जो की Repetition या Periodic Nature में होता है एवं भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा Repetition या Periodic भुगतान करने के लिए Quick Method प्रदान करने की पेशकस की गयी है जिससे की भुगतान प्रणाली को पहले से काफी ज्यादा बेहतर बनाया जा सके और पेमेंट सुविधा को थोडा तेज किया जा सके.

ECS के कारण लेनदेन से जुड़े कई तरह के कार्य बेहद ही आसानी से हो जाते है जैसे की आपने किसी भी प्रकार का लोन लिया हुआ है और आप उसकी किस्ते भरते है तो इसकी क़िस्त ECS के रूप में भी डेबिट की जाती है इससे किसी भी अकाउंट की क़िस्त सही समय पर ली जा सकती है और इसमें ग्राहक को क़िस्त की तारीख याद रखने की जरुरत भी नहीं पडती इसके साथ ही इस प्रोसेस का सबसे बड़ा फायदा यह भी है की इसमें किसी कारण से पेमेंट फेल होने की आशंका नही रहती एवंपेमेंट देरी से होने पर लिए जाने वाले जुर्माने आदि से भी बचा जा सकता है.

ECS कितने प्रकार का है

अक्सर ज्यादातर लोगो को इसके बारे में पता नही होता की ECS कितने प्रकार का होता है तो हम आपको बता दे की यह 2 अलग अलग प्रकार का होता है जो की निम्न प्रकार से है.

ECS Credit – इसके अंतर्गत एक संस्थान आपके बैंक अकाउंट में क्रेडिट करता है जैसे की आपकी सैलरी आती है तो उसे एक से ज्यादा खातो में ट्रान्सफर करने के लिए एक सिंगल अकाउंट को समय समय पर डेबिट कर दिया जाता है.

ECS Debit – यह थोडा अलग होता है इसमें आप किसी भी प्रकार के लोन, म्यूच्यूअल फंड, प्रोडक्ट, पालिसी आदि के लिए EMI के रूप में भुगतान करते है उसे ECS डेबिट कहते है.

यह दोनों ही तरीके लेनदेन से सम्बंधित होते है लेकिन एक में फंड को अलग अलग अकाउंट में डेबिट किया जाता है तो दुसरे में किसी भी लोन आदि के पेमेंट को EMI के रूप में डेबिट किया जाता है.

ECS के फायदे

ECS के कई अलग अलग तरह के फायदे होते है जिनके बारे में हर एक व्यक्ति को पता होना बेहद ही आवश्यक है हम आपको इसके कुछ फायदों के बारे में बता रहे है जिसके बारे में आपको पता होना चाहिए हम आपको इसके बेहद ही खास फायदे बता रहे है जो की निम्न प्रकार से है.

  • इस सेवा के द्वारा किसी भी बिल का सही समय पर भुगतान किया जा सकता है.
  • इस सेवा को आसानी से शुरू या बंद किया जा सकता है.
  • यह सेवा किसी भी ग्राहक की संतुष्टि को बेहद ही ज्यादा अहमियत देती है.
  • ECS के कारण बैंकिंग कार्यो में बेहद ही तेजी आई है.
  • इस सेवा द्वारा देर से भुगतान करने पर भी आपको किसी भी तरह का शुल्क नहीं देना पड़ता.
  • इस सेवा का इस्तमाल होने से कागजो का इस्तमाल बेहद ही ज्यादा कम हो चूका है.
  • इसके द्वारा किसी भी प्रकार के लोन, म्यूच्यूअल फंड, प्रीमियम, क्रेडिट कार्ड, EMI आदि का भुगतान बहुत ही आसानी से किया जा सकता है.
  • इस सेवा का इस्तमाल करके ग्राहक किसी भी प्रकार के बिजली के बिल, टेलेफोन के बिल, मोबाइल के बिल आदि का भुगतान कर सकता है.

इस तरह से इस सेवा के कई अलग अलग फायदे होते है जिनके बारे में आपको ध्यान रखना चाहिए एवं इसके फायदों को देखते हर एक बैंक में इसका इस्तमाल किया जाता है.

ECS का शुल्क

भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा इस सेवा को निशुल्क रखा गया है लेकिन कई बार क्लीयरिंग हॉउस के हिसाब से बैंक द्वारा इसका चार्ज भी लिया जा सकता है इसमें प्रति ट्रांजेक्शन के आपसे 25 पैसे या 50 पैसे का चार्ज लिया जा सकता है इसकी विस्तृत जानकारी आपको सम्बंधित बैंक से प्राप्त हो जाती है एवं इसमें आपको पेमेंट स्टॉप करने का विकल्प भी मिलता है अगर आप किसी भी पेमेंट को कैंसिल करना चाहते है तो इसके लिए आपको बैंक से संपर्क करना होता है एवं आपको इसकी सुचना जल्दी से जल्दी देनी होती है तभी आप पेमेंट को कैंसिल कर सकते है.

ECS के लिए आवेदन कैसे करें

अगर कोई भी व्यक्ति ECS के लिए आवेदन करना चाहता है तो बेहद ही आसानी से आवेदन कर सकता है इसके लिए कोई भी वेतनभोगी, सरकारी कर्मचारी, प्राइवेट कर्मचारी जिनके पास सैलरी अकाउंट है वो अपनी बैंक शाखा से ECS के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते है इसके लिए सबसे पहले आपको बैंक से संपर्क करना है और उन्हें ECS रजिस्ट्रेशन के लिए कहना है इसके बाद बैंक से आपको एक फॉर्म दिया जाता हैं जिसे भरकर आपको जमा करना होता है इसके बाद बैंक के द्वारा ECS एक्टिवेशन कर दिया जाता है.

Calculation – इस आर्टिकल में हमने आपको ECS Full Form In Hindi के बारे में जानकारी दी है हमे उम्मीद है आपको हमारी बताई जानकारी उपयोगी लगी होगी अगर आपको जानकारी अच्छी लगे तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर जरुर करें और इससे जुडा किसी भी प्रकार का सवाल पूछना चाहे तो आप हमे कमेंट करके भी बता सकते है.

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